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Mohan Bhagwat Statement: “भगवान ने नहीं, पंडितों ने बनाई ऊंच-नीच की श्रेणी” — मोहन भागवत का जाति व्यवस्था पर बयान

Posted on August 31, 2026 by BiharTalkies
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Mohan Bhagwat Statement: “भगवान ने नहीं, पंडितों ने बनाई ऊंच-नीच की श्रेणी” — मोहन भागवत का जाति व्यवस्था पर बयान
“भगवान ने नहीं, पंडितों ने बनाई ऊंच-नीच की श्रेणी और जाति की खाई” — मोहन भागवत का विवादित बयान

मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का जाति व्यवस्था को लेकर दिया गया एक पुराना बयान एक बार फिर चर्चा में है। फरवरी 2023 में मुंबई में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने कहा था कि भगवान के लिए सभी मनुष्य समान हैं और समाज में जाति तथा ऊंच-नीच की श्रेणी ईश्वर ने नहीं बनाई, बल्कि इसे पंडितों ने बनाया। उन्होंने इसे गलत व्यवस्था बताया था।

भागवत ने अपने संबोधन में कहा था कि भगवान ने हमेशा यही बताया है कि उनके लिए सभी एक समान हैं। उनके अनुसार, भगवान के सामने किसी तरह का जाति या वर्ण भेद नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज में अलग-अलग श्रेणियां बनाई गईं और यही व्यवस्था आगे चलकर ऊंच-नीच के भेद में बदल गई।

“हर काम समाज के लिए है तो कोई ऊंचा-नीचा कैसे?”

RSS प्रमुख ने अपने संबोधन में पेशे और सामाजिक जिम्मेदारी को भी जाति व्यवस्था से जोड़ते हुए सवाल उठाया था कि जब हर व्यक्ति का काम समाज के लिए महत्वपूर्ण है, तो फिर किसी को ऊंचा और किसी को नीचा कैसे माना जा सकता है?

उन्होंने कहा था कि व्यक्ति की आजीविका केवल अपने परिवार या पेट भरने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज के प्रति भी उसकी जिम्मेदारी होती है। उनके मुताबिक समाज में किसी काम को छोटा या बड़ा समझने की मानसिकता बेरोजगारी और सामाजिक विभाजन जैसी समस्याओं को बढ़ाती है।

समाज के बंटवारे को लेकर भी साधा था निशाना

भागवत ने अपने भाषण में भारतीय समाज के बंटवारे को लेकर भी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि समाज के विभाजन का फायदा बाहरी लोगों ने उठाया और इसी कारण देश को लंबे समय तक नुकसान झेलना पड़ा।

उन्होंने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा था कि जब समाज में अपनापन खत्म होता है तो स्वार्थ बढ़ता है। उनका तर्क था कि समाज को जाति और ऊंच-नीच के आधार पर बांटने के बजाय आपसी एकता और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत किया जाना चाहिए।

संत रविदास की शिक्षाओं का किया जिक्र

यह टिप्पणी उन्होंने संत रविदास जयंती के कार्यक्रम में की थी। भागवत ने संत रविदास की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए समाज को जोड़ने और सामाजिक समानता पर जोर दिया था।

उन्होंने कहा था कि धर्म का उद्देश्य केवल व्यक्ति के निजी हित तक सीमित नहीं होना चाहिए। समाज की उन्नति और पूरे समाज को जोड़ने के लिए काम करना भी धर्म का हिस्सा है।

भागवत ने संत रविदास सहित कई संतों और विचारकों का जिक्र करते हुए कहा था कि उनके कहने का तरीका अलग-अलग हो सकता है, लेकिन समाज को जोड़ना और धर्म से जुड़े रहना उनकी शिक्षाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

रामचरितमानस विवाद के बीच आया था बयान

भागवत का यह बयान उस समय सामने आया था जब देश में रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद चल रहा था। समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस के कुछ अंशों पर सवाल उठाते हुए जातिगत भेदभाव का मुद्दा उठाया था। इसी राजनीतिक-सामाजिक माहौल में भागवत की जाति व्यवस्था पर टिप्पणी ने व्यापक बहस को जन्म दिया।

बयान पर हुआ था विवाद

भागवत के “पंडितों ने श्रेणी बनाई” वाले बयान के बाद अलग-अलग वर्गों से प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। कुछ नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे जाति व्यवस्था के खिलाफ महत्वपूर्ण टिप्पणी बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे ब्राह्मण समाज के लिए आपत्तिजनक बताया।

छत्तीसगढ़ में ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों द्वारा इस बयान के विरोध में ज्ञापन दिए जाने की भी खबर सामने आई थी। वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य ने भागवत के बयान का समर्थन करते हुए इसे जाति व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति बताया था।

हालांकि, “पंडितों ने जाति की श्रेणी बनाई” वाला उनका कथन सबसे ज्यादा विवाद का विषय बना। इस बयान की अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों ने अपने-अपने नजरिए से व्याख्या की।
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