एंडोस्कोपी कैमरे से प्रश्नपत्र लीक! प्रोफेसर ने सीलबंद लिफाफे में किया छेद, ₹11 हजार में छात्रों क�
Posted on August 23, 2026 by
BiharTalkies
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रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) से जुड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस ने एक निजी कृषि कॉलेज के प्रोफेसर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाने के लिए सीलबंद लिफाफे में बारीक छेद कर एंडोस्कोपी कैमरे से अंदर रखे प्रश्नपत्र की रिकॉर्डिंग की गई। इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री छात्रों तक पहुंचाई गई और कथित तौर पर इसे ₹11 हजार में बेचा गया।
सुई से लिफाफे में छेद, कैमरे से रिकॉर्डिंग
पुलिस के मुताबिक, मामले का कथित मास्टरमाइंड योगेश सोनकेसरिया है, जो दुर्ग जिले के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में प्रोफेसर है। आरोप है कि उसने परीक्षा के लिए प्राप्त प्रश्नपत्रों में से एक प्रश्नपत्र वाला सीलबंद लिफाफा अपने घर ले जाकर उसमें बारीक छेद किया।
इसके बाद मेडिकल जांच में इस्तेमाल होने वाले एंडोस्कोपी कैमरे को उस छेद के जरिए अंदर डालकर प्रश्नपत्र की तस्वीर/वीडियो रिकॉर्ड की गई। यानी लिफाफे की सील को पूरी तरह खोले बिना ही प्रश्नपत्र की सामग्री हासिल करने की कोशिश की गई।
छात्रों से वसूले गए 11-11 हजार रुपये
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्नपत्र की सामग्री हासिल करने के बाद उसे छात्रों तक पहुंचाया गया। रिपोर्टों में दावा है कि प्रश्नपत्र को 11-11 हजार रुपये में बेचा गया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक प्रश्नपत्र के सवालों को हाथ से लिखकर छात्रों तक पहुंचाया गया था।
यह पूरा मामला सामने आने के बाद परीक्षा व्यवस्था की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और उन्हें रखने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परीक्षा से पहले WhatsApp पर पहुंचा पेपर
मामला तब सामने आया जब परीक्षा से करीब दो घंटे पहले प्रश्नपत्र और कथित तौर पर उसके उत्तर छात्रों के WhatsApp ग्रुपों तक पहुंचने की जानकारी मिली। विश्वविद्यालय प्रबंधन को इसकी सूचना मिलने के बाद परीक्षा को स्थगित करने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
36 घंटे में पुलिस ने खोला नेटवर्क
पेपर लीक की शिकायत के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 36 घंटे की जांच में पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया के अलावा अनुज मिंज, अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय और आदित्य साहू के नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार मामले में दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
एंडोस्कोपी कैमरा समेत कई सामान बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर पेपर लीक में इस्तेमाल एंडोस्कोपी कैमरा, मोबाइल फोन, केबल, कनेक्टर और लिफाफे में छेद करने वाले उपकरण सहित अन्य सामान बरामद किए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे और प्रश्नपत्र लीक का यह खेल कितने समय से चल रहा था।
परीक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस पूरे मामले ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि विश्वविद्यालय के गोपनीय और सीलबंद प्रश्नपत्र आखिर परीक्षा से पहले एक प्रोफेसर के घर तक कैसे पहुंचे?
अगर जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक प्रश्नपत्र की चोरी का मामला नहीं, बल्कि परीक्षा की पूरी गोपनीयता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। अब निगाहें पुलिस जांच और विश्वविद्यालय प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर हैं।
सुई से लिफाफे में छेद, कैमरे से रिकॉर्डिंग
पुलिस के मुताबिक, मामले का कथित मास्टरमाइंड योगेश सोनकेसरिया है, जो दुर्ग जिले के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में प्रोफेसर है। आरोप है कि उसने परीक्षा के लिए प्राप्त प्रश्नपत्रों में से एक प्रश्नपत्र वाला सीलबंद लिफाफा अपने घर ले जाकर उसमें बारीक छेद किया।
इसके बाद मेडिकल जांच में इस्तेमाल होने वाले एंडोस्कोपी कैमरे को उस छेद के जरिए अंदर डालकर प्रश्नपत्र की तस्वीर/वीडियो रिकॉर्ड की गई। यानी लिफाफे की सील को पूरी तरह खोले बिना ही प्रश्नपत्र की सामग्री हासिल करने की कोशिश की गई।
छात्रों से वसूले गए 11-11 हजार रुपये
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्नपत्र की सामग्री हासिल करने के बाद उसे छात्रों तक पहुंचाया गया। रिपोर्टों में दावा है कि प्रश्नपत्र को 11-11 हजार रुपये में बेचा गया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक प्रश्नपत्र के सवालों को हाथ से लिखकर छात्रों तक पहुंचाया गया था।
यह पूरा मामला सामने आने के बाद परीक्षा व्यवस्था की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और उन्हें रखने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परीक्षा से पहले WhatsApp पर पहुंचा पेपर
मामला तब सामने आया जब परीक्षा से करीब दो घंटे पहले प्रश्नपत्र और कथित तौर पर उसके उत्तर छात्रों के WhatsApp ग्रुपों तक पहुंचने की जानकारी मिली। विश्वविद्यालय प्रबंधन को इसकी सूचना मिलने के बाद परीक्षा को स्थगित करने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
36 घंटे में पुलिस ने खोला नेटवर्क
पेपर लीक की शिकायत के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 36 घंटे की जांच में पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया के अलावा अनुज मिंज, अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय और आदित्य साहू के नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार मामले में दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
एंडोस्कोपी कैमरा समेत कई सामान बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर पेपर लीक में इस्तेमाल एंडोस्कोपी कैमरा, मोबाइल फोन, केबल, कनेक्टर और लिफाफे में छेद करने वाले उपकरण सहित अन्य सामान बरामद किए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे और प्रश्नपत्र लीक का यह खेल कितने समय से चल रहा था।
परीक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस पूरे मामले ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि विश्वविद्यालय के गोपनीय और सीलबंद प्रश्नपत्र आखिर परीक्षा से पहले एक प्रोफेसर के घर तक कैसे पहुंचे?
अगर जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक प्रश्नपत्र की चोरी का मामला नहीं, बल्कि परीक्षा की पूरी गोपनीयता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। अब निगाहें पुलिस जांच और विश्वविद्यालय प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर हैं।
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