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नीतीश कुमार के मंत्री बेटे निशांत कुमार के इंजिनियर होने का दावा निकला झूठा

Posted on June 09, 2026 by BiharTalkies
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नीतीश कुमार के मंत्री बेटे निशांत कुमार के इंजिनियर होने का दावा निकला झूठा
नीतीश कुमार के बेटे स्वास्थ मंत्री निशांत कुमार के इंजिनियर होने का दावा निकला झूठा

इंजीनियर नहीं, फिर क्यों बनाया गया "इंजीनियर" का नैरेटिव? निशांत कुमार की शैक्षणिक योग्यता पर उठते सवाल

बिहार की राजनीति में वर्षों से यह धारणा बनाई जाती रही कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र और वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार इंजीनियर हैं। समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा भी समय-समय पर उनकी पहचान एक इंजीनियर के रूप में प्रस्तुत की जाती रही। लेकिन चुनावी हलफनामे में सामने आई जानकारी ने इस दावे पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

हलफनामे के अनुसार निशांत कुमार ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू तो की थी, लेकिन उसे पूरा नहीं किया। उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त नहीं की और बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि उनके पास इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं है, तो उन्हें लंबे समय तक "इंजीनियर निशांत कुमार" के रूप में क्यों प्रचारित किया गया? आश्चर्यजनक रूप से पिता-पुत्र द्वारा इस असत्य प्रचार का कभी खंडन भी नही किया गया। जिससे इस फर्जी दावे को और हवा मिली।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय राजनीति में शैक्षणिक योग्यता को अक्सर छवि निर्माण के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। किसी नेता को डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर या प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाला बताना जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता बढ़ाने का साधन माना जाता है। आलोचकों का आरोप है कि निशांत कुमार के मामले में भी इसी प्रकार का राजनीतिक ब्रांडिंग अभियान चलाया गया। यहां तक कि खुद को नितीश कुमार के मानस पुत्र होने का दावा करने वाले कुछ विधायक, मंत्री, सांसद और जदयू के प्रवक्ताओं ने ये फर्जी दावा किया।

विपक्षी दलों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने मात्र से इंजीनियर कहलाने लगे, तो फिर लाखों ऐसे छात्र भी इंजीनियर कहलाने के हकदार होंगे जिन्होंने किसी तकनीकी संस्थान में प्रवेश लिया लेकिन डिग्री पूरी नहीं कर सके। उनके अनुसार इंजीनियर कहलाने के लिए डिग्री प्राप्त करना आवश्यक है, केवल कुछ सेमेस्टर पढ़ लेना पर्याप्त नहीं।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार की राजनीति में वंशवाद और योग्यता को लेकर बहस तेज है। विरोधी दल सवाल उठा रहे हैं कि क्या जनता को वास्तविक जानकारी दी गई थी, या फिर एक सुनियोजित राजनीतिक छवि गढ़ी गई थी। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनता के सामने नेताओं की सही शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि रखना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

हालांकि जदयू समर्थकों का तर्क है कि निशांत कुमार ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, इसलिए उन्हें इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाला कहना गलत नहीं है। लेकिन आलोचकों का जवाब है कि पढ़ाई शुरू करना और डिग्री हासिल करना दो अलग-अलग बातें हैं, और जनता के सामने दोनों के बीच का अंतर स्पष्ट होना चाहिए।

इस पूरे विवाद ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या राजनीति में छवि निर्माण के लिए तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है? और यदि ऐसा है, तो क्या जनता को भ्रमित करने वाली ऐसी राजनीतिक संस्कृति पर पुनर्विचार नहीं होना चाहिए?

निशांत कुमार की शैक्षणिक योग्यता का मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि राजनीति में पारदर्शिता, जवाबदेही और सत्यनिष्ठा की बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।
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