निशांत कुमार के स्वास्थ्य महकमे में एक से बढ़कर एक ‘नमूने’! एक्सपायरी दवा पर सिविल Surgen का बवाली बय�
Posted on August 15, 2026 by
BiharTalkies
News and Politics
निशांत कुमार के स्वास्थ्य महकमे में एक से बढ़कर एक ‘नमूने’! एक्सपायरी दवा पर सिविल सर्जन के कथित बयान से मचा बवाल
गोपालगंज। बिहार के स्वास्थ्य महकमे से सामने आया एक कथित बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। गोपालगंज के सिविल सर्जन डॉ. मो. ईशराईल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें एक्सपायरी दवा को लेकर कथित तौर पर कहा गया—“एक्सपायरी दवा खाने से कुछ नहीं होता, सिर्फ उसका पावर कम हो जाता है।”
बयान सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि अगर किसी मरीज को एक्सपायरी दवा के इस्तेमाल की ऐसी सलाह दी जाए, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
स्वास्थ्य महकमे में ‘एक से बढ़कर एक नमूने’?
इस कथित बयान को लेकर विपक्ष और सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह भी है कि क्या सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता और एक्सपायरी डेट की निगरानी को लेकर पर्याप्त गंभीरता बरती जा रही है?
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के नेतृत्व वाले स्वास्थ्य महकमे में ऐसे विवाद लगातार चर्चा में क्यों आ रहे हैं? यह सवाल भी अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक उठाया जा रहा है।
एक्सपायरी दवा पर इतनी ‘बेखौफ’ सलाह?
दवा की एक्सपायरी डेट महज पैकेट पर छपी कोई सामान्य तारीख नहीं होती। इसके बाद दवा की गुणवत्ता और प्रभावशीलता की निर्माता कंपनी द्वारा गारंटी नहीं रहती। दवा को किस तापमान और नमी में रखा गया, इसका भी उसकी स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
ऐसे में किसी भी मरीज को एक्सपायरी दवा खाने की सलाह देना गंभीर मामला माना जा सकता है। खासकर एंटीबायोटिक जैसी दवाओं के मामले में उपचार की प्रभावशीलता कम होने पर मरीज के इलाज पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।
अब जवाबदेही किसकी?
अगर वायरल वीडियो में कही गई बात सही है, तो स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या एक्सपायरी दवा को लेकर ऐसी सलाह विभाग की आधिकारिक नीति है?
और अगर यह अधिकारी का निजी या संदर्भ से अलग बयान है, तो स्वास्थ्य विभाग को उसका आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने रखना चाहिए।
मामला सिर्फ एक बयान का नहीं है। मामला उन मरीजों का है जो सरकारी अस्पतालों में इलाज और दवा के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा करते हैं।
निशांत कुमार के स्वास्थ्य महकमे में ‘एक से बढ़कर एक नमूने’ सामने आने के आरोपों के बीच अब देखना होगा कि इस कथित बयान पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग क्या सफाई देता है।
गोपालगंज। बिहार के स्वास्थ्य महकमे से सामने आया एक कथित बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। गोपालगंज के सिविल सर्जन डॉ. मो. ईशराईल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें एक्सपायरी दवा को लेकर कथित तौर पर कहा गया—“एक्सपायरी दवा खाने से कुछ नहीं होता, सिर्फ उसका पावर कम हो जाता है।”
बयान सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि अगर किसी मरीज को एक्सपायरी दवा के इस्तेमाल की ऐसी सलाह दी जाए, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
स्वास्थ्य महकमे में ‘एक से बढ़कर एक नमूने’?
इस कथित बयान को लेकर विपक्ष और सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह भी है कि क्या सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता और एक्सपायरी डेट की निगरानी को लेकर पर्याप्त गंभीरता बरती जा रही है?
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के नेतृत्व वाले स्वास्थ्य महकमे में ऐसे विवाद लगातार चर्चा में क्यों आ रहे हैं? यह सवाल भी अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक उठाया जा रहा है।
एक्सपायरी दवा पर इतनी ‘बेखौफ’ सलाह?
दवा की एक्सपायरी डेट महज पैकेट पर छपी कोई सामान्य तारीख नहीं होती। इसके बाद दवा की गुणवत्ता और प्रभावशीलता की निर्माता कंपनी द्वारा गारंटी नहीं रहती। दवा को किस तापमान और नमी में रखा गया, इसका भी उसकी स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
ऐसे में किसी भी मरीज को एक्सपायरी दवा खाने की सलाह देना गंभीर मामला माना जा सकता है। खासकर एंटीबायोटिक जैसी दवाओं के मामले में उपचार की प्रभावशीलता कम होने पर मरीज के इलाज पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।
अब जवाबदेही किसकी?
अगर वायरल वीडियो में कही गई बात सही है, तो स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या एक्सपायरी दवा को लेकर ऐसी सलाह विभाग की आधिकारिक नीति है?
और अगर यह अधिकारी का निजी या संदर्भ से अलग बयान है, तो स्वास्थ्य विभाग को उसका आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने रखना चाहिए।
मामला सिर्फ एक बयान का नहीं है। मामला उन मरीजों का है जो सरकारी अस्पतालों में इलाज और दवा के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा करते हैं।
निशांत कुमार के स्वास्थ्य महकमे में ‘एक से बढ़कर एक नमूने’ सामने आने के आरोपों के बीच अब देखना होगा कि इस कथित बयान पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग क्या सफाई देता है।
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